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ज़à¥à¤•ाम
सामानà¥à¤¯ ज़à¥à¤•ाम को नैसोफेरिंजाइटिस, राइनोफेरिंजाइटिस, अतà¥à¤¯à¤§à¤¿à¤• नज़ला या ज़à¥à¤•ाम के नाम से à¤à¥€ जाना जाता है। यह ऊपरी शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° का आसानी से फैलने वाला संकà¥à¤°à¤¾à¤®à¤• रोग है जो अधिकांशतः नासिका को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है।[1] इसके लकà¥à¤·à¤£à¥‹à¤‚ में खांसी, गले की खराश, नाक से सà¥à¤°à¤¾à¤µ (राइनोरिया) और जà¥à¤µà¤° आते हैं। लकà¥à¤·à¤£ आमतौर पर सात से दस दिन के à¤à¥€à¤¤à¤° समापà¥à¤¤ हो जाते हैं। हालांकि कà¥à¤› लकà¥à¤·à¤£ तीन सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ तक à¤à¥€ रह सकते हैं। à¤à¤¸à¥‡ दो सौ से अधिक वायरस होते हैं जो सामानà¥à¤¯ ज़à¥à¤•ाम का कारण बन सकते हैं। राइनोवायरस इसका सबसे आम कारण है। नाक, साइनस, गले या कंठनली (ऊपरी शà¥à¤µà¤¸à¤¨ तंतà¥à¤° का संकà¥à¤°à¤®à¤£ (URI या URTI) का तीवà¥à¤° संकà¥à¤°à¤®à¤£ शरीर के उन अंगों दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ वरà¥à¤—ीकृत किया जाता है जो इससे सरà¥à¤µà¤¾à¤§à¤¿à¤• पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ होते है सामानà¥à¤¯ ज़à¥à¤•ाम मà¥à¤–à¥à¤¯ रूप से नासिका, फेरिंजाइटिस, शà¥à¤µà¤¾à¤¸à¤¨à¤²à¤¿à¤•ा को और साइनोसाइटिस, साइनस को पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤¿à¤¤ करता है। यह लकà¥à¤·à¤£ सà¥à¤µà¤¯à¤‚ वायरस दà¥à¤µà¤¾à¤°à¤¾ ऊतकों को नषà¥à¤Ÿ किठजाने से नहीं अपितॠसंकà¥à¤°à¤®à¤£ के पà¥à¤°à¤¤à¤¿ हमारी पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ पà¥à¤°à¤£à¤¾à¤²à¥€ की पà¥à¤°à¤¤à¤¿à¤•à¥à¤°à¤¿à¤¯à¤¾ के कारण उतà¥à¤ªà¤¨à¥à¤¨ होते हैं। संकà¥à¤°à¤®à¤£ को रोकने के लिठहाथ धोना मà¥à¤–à¥à¤¯ तरीका है। कà¥à¤› पà¥à¤°à¤®à¤¾à¤£ चेहरे पर मासà¥à¤• पहनने की पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¤•ारिता का à¤à¥€ समरà¥à¤¥à¤¨ करते हैं।
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